10 ग्राम बायविडंग और 10 ग्राम सफेद फिटकरी थोड़ी कूटकर 3 किलो पानी में उबालें। 1 किलो शेष रहने पर छानकर बोतल में भरकर रख लें। तेज दांत के दर्द में सुबह और रात इस पानी से कुल्ला करने से 2 दिन में ही आराम आ जाता है। कुछ अधिक दिन कुल्ला करने से दांत पत्थर की तरह मजबूत हो जाते हैं।
दांत संबंधी सभी प्रकार के कठिन एवं असाध्य रोगों के लिए बायविडंग अचूक औषधि सिद्ध हो चुकी है यह आयुर्वेद रिसर्च काउंसिल दिल्ली का अनुसंधान है।
विडंग पौधे का परिचय
विडंग (एम्बेलिया रिब्स) एक झाड़ीनुमा पौधा है, जो अनेक औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इस पौधे की टहनियाँ पतली और लचीली होती है।आयुर्वेदिक चिकित्सा के अनुसार यह काली मिर्च के समान रंग होने के कारण दूसरी काली मिर्च के नाम से भी जाना जाता है । यह पौधा सफेद फूल वाला होता है । इस औषधीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटी का विकास भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में बहुत ज्यादा होता है जैसे निचले और मध्य हिमालय, पश्चिमी घाट, दक्कन, दक्षिण भारत, असम, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु आदि ।भारत देश के अलावा यह भूटान, चीन, पाकिस्तान और नेपाल में भी पाया जाता है।प्राचीन काल से ही इस औषधीय पौधे की जड़ और फलों का इस्तेमाल आयुर्वेद के अंदर अनेक रोगों की औषधियाँ बनाने के लिए किया जाता रहा है ।इस लेख में हम इस औषधीय पौधे के आयुर्वेदिक गुणों के बारे में जानेगें ।
विडंग के लिए विभिन्न पर्यायवाची शब्द हैं – अमोघा, चित्रतण्डुल कृमिघ्न, जंतुनाशन, बेल, और तण्डुल । यह गर्म के साथ स्वाद में तीखा है। यह रुक्ष है, पचाने के लिए हल्का है और पाचक अग्नि को उत्तेजित करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह जड़ी-बूटी शरीर के अंदर कफ और वात दोष को संतुलित रखने वाली होती है और जलोदर, कृमि संक्रमण, पेट फूलना, कब्ज और पेट दर्द में बहुत फायदेमंद साबित होती है।
औषधीय उपयोग में अधिकतर इसके फल का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कई जगह जड़ का प्रयोग भी किया जाता है | फल गुच्छों के रूप में कालीमिर्च के सामान गोल और छोटे होते है, जो पकने पर लाल और सूखने पर काले हो जाते है | फल कालीमिर्च के सामान होने के कारण ये कालीमिर्च का आभास करवाते है |
इसके पते 3 इंच तक लम्बे और 1.5 इंच तक चौड़े होते है | ये आगे से नुकीले एवं अंडाकार आकृति के होते है | विडंग के फुल सफेद या हरिताभ शाखाओं के अग्रिम प्रान्तों में गुच्छो के रूप में लगे रहते है |
विडंग के औषधीय गुण आइये जानते हैं
ये इस प्रकार हैं
- रस (स्वाद) – कषाय (कसैला), कटु (तीक्ष्ण) गुण – लघु रुक्ष, तीक्ष्ण
- वीर्य- उष्ण (गर्म)
- विपाक (पचने के बाद) – कटू(तीखा)
- एंटी-हेल्मिंथिक – यह परजीवी के इलाज में उपयोग की जाने वाली जड़ी-बूटी है
- डायरिया को रोकने वाली – यह दस्त को रोकने के लिए प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटी है
- कुष्ठ रोग – यह त्वचा के विकारों को ठीक करने के लिए प्रयोग की जाने वाली जड़ी-बूटी मानी जाती है।
- कृमि – आयुर्वेद के अनुसार इस जड़ी बूटी का उपयोग कृमि रोगों को दूर करने के लिए किया जाता है जैसे संक्रमण आदि।
वायविडंग के गुण धर्म
रस – तिक्त एवं कटु
गुण – तीक्ष्ण , रुक्ष एवं लघु |
वीर्य – उष्ण |
विपाक – कटू |
रोग्प्रभाव एवं सेवन की मात्रा
वायविडंग का सेवन 1 से 6 ग्राम तक चिकित्सक के निर्देशानुसार सेवन किया जा सकता है | आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग में इसके फल का इस्तेमाल किया जाता है | विडंग द्रव्य के इस्तेमाल से विडंगादी चूर्ण, विडंगाडी लौह, विडंगारिष्ट, हरितक्यादी योग, कृमिमुद्गर रस आदि का निर्माण किया जाता है |
वायविडंग के उपयोग या फायदे
आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में विडंग का निम्न रोगों के उपचार में प्रयोग किया जाता है |
- पेट के कीड़ों के लिए आयुर्वेद में वायविडंग का इस्तेमाल प्रमुखता से किया जाता है | इसके प्रयोग से सभी प्रकार के कृमि (कीड़े) जैसे गोलकृमि, धागाकृमि एवं टेपवर्म आदि का आसानी से उपचार किया जा सकता है |
- रक्तशोधक गुणों से युक्त होने कारण रक्त की अशुद्धियों को दूर करने के साथ – साथ शरीर से टोक्सिनस को बाहर निकालने में भी उपयोगी है |
- विडंगादी चूर्ण के इस्तेमाल से पाचन ठीक होता है एवं अग्निमंध्य की समस्या से छुटकारा मिलता है |
- वायविडंग में एंटीफंगल एवं एंटीबैक्टीरियल गुण होते है जो इसे त्वचा विकारों में फायदेमंद साबित करते है |
- कफ जनित कृमि के उपचार में विडंग का इस्तेमाल लाभदायक होता है |
- मधुमेह के उपचार में भी यह फायदेमंद साबित होता है |
- सभी प्रकार की वातव्याधि में इसका प्रयोग किया जाता है |
- अजीर्ण एवं अरुचि में लाभदायक है |
- विडंग शिरोविरेचन गुणों से युक्त होता है अर्थात इसके इस्तेमाल से सिर के दोषों का नाश होता है | आयुर्वेद के षड्बिन्दु तेल और अणुतेल में विडंग सहायक औषध द्रव्य होता है |
- वायविडंग के पतों का इस्तेमाल मुंह के छालों और गले के विकारों में किया जाता है |
- यह शरीर की अतिरिक्त फैट को भी घटाता है | इसलिए मेदोहर औषधि के रूप में इसका इस्तेमाल किया जाता है |
- अस्थमा एवं क्षय रोग में भी विडंग का इस्तेमाल फायदेमंद होता है |
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए विडंग के फायदे
आयुर्वेद चिकित्सा के अंदर इसका उपयोग विभिन्न रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। इसका उपयोग असंतुलित वात और कफ के बीच संतुलन बनाने के लिए किया जाता है ।यह औषधीय जड़ी बूटी पाचन में सुधार करने के लिए बहुत उपयोगी मानी जाती है। इसके स्वास्थ्य लाभ इस प्रकार हैं
1. त्वचा की बीमारियों जैसे मुंहासे या पिंपल्स में दूर करने में सहायक
विडंग रक्त को स्वच्छ रखने वाली अच्छी औषधि मानी गयी है, यह सूजन को कम करता है, प्राकृतिक और चमकदार त्वचा प्रदान करने में सहायक होता है और यह लसीका पर भी लाभकारी होता है। यह औषधि बाहरी और आंतरिक रूप से उपयोग किए जाने पर मुँहासे और पिंपल्स को खत्म करने में मददगार साबित होती है। यह नाक की सूजन को कम करने में भी अच्छा परिणाम देता है। इसके अंदर एंटी-फंगल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो त्वचा की समस्याओं को दूर करने में सहायक साबित होते हैं । आयुर्वेद के अनुसार मुख्य रूप से ताजी पत्तियों का लेप त्वचा की समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है।
2. कब्ज में फायदेमंद
विडंग अपच का इलाज करने में मददगार साबित होता है और पाचन शक्ति को दुरुस्त रखने के साथ-साथ पेट कि समस्याएं जैसे कब्ज ,गैस ,बदहजमी आदि को दूर करने में लाभदायक माना जाता है । यह शरीर कि जठराग्नि को सामान्य करने में मदद करता है और पाचन में सुधार करता है।अगर इसकी जड़ का अर्क तैयार करके सुबह खाली पेट एक कप अर्क का सेवन किया जाए तो यह प्रयोग पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के अलावा कब्ज की समस्या को बहुत जल्दी दूर करने में असरदार साबित होता है ।
3. शुगर को रखे संतुलित
विडंगशरीर के अंदर रक्त में शुगर स्तर को नियंत्रित करने में बहुत मददगार साबित होता है ।यह शरीर की अत्यधिक चर्बी को कम करने में सहायक होता है क्योंकि यह मेद धातु पर काम करता है।
4. अपच को दूर करने में सहायक
विडंग एक अच्छी भूख बढ़ाने वाली औषधि है। यह शरीर के अंदर जठराग्नि को उत्तेजित करने में मददगार और दर्द, सूजन और पेट फूलने की समस्याओं को दूर करने में लाभकारी साबित होता है । यह पाचन में सुधार करता है। यह जड़ी-बूटी शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होती है ।
5. बवासीर को खत्म करे
यह जड़ी-बूटी आंत की गतिशीलता को उत्तेजित करती है और मूत्राशय के रास्ते हानिकारक बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मददगार साबित होती है। यह भूख को बढ़ाता है और शरीर के अंदर कब्ज को ठीक करता है जो बवासीर का सबसे बड़ा कारण होती है । इसलिए बवासीर से ग्रसित व्यक्ति को इस औषधीय गुणों से भरपूर बूटी का सेवन करना चाहिए ।
6. रक्त को स्वच्छ रखने में असरदार
विडंगरक्त शोधक के रूप में कार्य करता है और हानिकारक अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों को साफ करने के लिए उपयोग किया जाता है ।यह हानिकारक रक्त को शरीर के अंदर नष्ट करने में सहायक साबित होता है ।
7. दांतों के लिए लाभदायक
यह जड़ी बूटी दन्त संबंधित समस्याओं जैसे दर्द, सूजन, क्षय आदि में बहुत उपयोगी साबित होती है।अगर इस जड़ी बूटी के चूर्ण से मंजन किया जाए तो यह मसूड़ों को मजबूत बनाने के साथ-साथ दांतों को साफ और बिमारियों से सुरक्षित रखता है ।
8. गले के लिए फायदेमंद
यह जड़ी बूटी मुंह के छालों और गले की खराश के इलाज में बहुत मददगार साबित होती है।इसके इस्तेमाल के लिए इसकी जड़ से अर्क तैयार करके उसके साथ गरारे करने से आपकी मुँह के छाले और गले की खराश बहुत जल्दी दूर हो जाती है ।
विडंगचूर्ण
यह जड़ी बूटी विडंग (एम्बेलिया रिब्स) का एक शुद्ध अर्क है और आपके शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक साबित होता है। यह चूर्ण आंतरिक रूप से और साथ ही बाहरी रूप से उपयोग किया जा सकता है। इसमें एंटी-हेल्मिंथिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और यह , दाद, खुजली आदि के खिलाफ भी काम करता है। इसका उपयोग संक्रामक त्वचा की समस्याओं के इलाज के लिए भी किया जाता है, यह पेट की सूजन और दर्द से राहत देता है, पाचन क्रिया को दुरुस्त और भूख में सुधार करता है, कब्ज से छुटकारा दिलाता है, शरीर के चयापचय कार्यों को बनाए रखता है और विषाक्त पदार्थों को खत्म करता है।